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वर्तमान समय में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रत्नों का बहुत महत्व है। लोग अपने जीवन में सुख, समृद्धि, और स्वास्थ्य के लिए रत्नों का सेवन करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना सही विश्लेषण के रत्न पहनना नुकसानदेह हो सकता है? यह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि किसी भी रत्न को पहनने से पहले आपकी कुंडली का सही तरीके से अध्ययन किया जाए।।
पिछले ब्लॉग में हमने रत्नों के लाभ और उनके नकारात्मक प्रभावों (साइड इफेक्ट्स) के बारे में चर्चा की थी। अब, हम एक बहुत ही ताजे और वायरल उदाहरण की बात करेंगे, जो महाराष्ट्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मामला सोशल मीडिया, यूट्यूब और टीवी चैनल्स पर जबरदस्त तरीके से फैल चुका है, और इसमें एक मंत्री की स्थिति पर बड़ा असर पड़ा है।
नक्षत्र और वार के आधार पर ऋण लेना और देना शुभ या अशुभ हो सकता है। नीचे इसकी जानकारी दी गई है:
-किस नक्षत्र में ऋण नहीं लेना चाैहैिए
-किस दिन (वार) ऋण नहीं लेना चाहिए
-किस दिन ऋण नहीं देना चाहिए
-सबसे शुभ दिन ऋण लेने के लिए
उज्जैन, जहाँ स्वयं महाकाल विराजमान हैं, वहाँ अनेक शक्तिशाली भैरव स्वरूप भी विद्यमान हैं। उन्हीं में से एक हैं — विक्रांत भैरव। यह मंदिर न केवल तांत्रिक साधकों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि जनसामान्य के लिए भी रक्षा, न्याय, विजय और तंत्र बाधा निवारण हेतु दिव्य स्थल माना जाता है।विक्रांत भैरव को "विजय भैरव" और "दंडनायक भैरव" भी कहा जाता है, जो अन्याय को समाप्त करने और साधक की रक्षा हेतु तत्पर रहते हैं।
उज्जैन नगरी स्वयं शिव की नगरी है और यहाँ के 84 महादेवों में से एक अत्यंत प्राचीन एवं जाग्रत स्थल है — अंगारेश्वर महादेव मंदिर, जो विशेष रूप से मंगल दोष, कुंडली में पित्र दोष, कर्ज एवं वैवाहिक अड़चनों को दूर करने के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पर विशेष रूप से मंगलभात पूजन किया जाता है, जो भारतवर्ष में एकमात्र ऐसी विशेष पूजन परंपरा मानी जाती है।
माँ बगलामुखी, दस महाविद्याओं में एक अत्यंत शक्तिशाली और रहस्यमयी देवी हैं। इन्हें "स्तम्भन" शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है — यानी ये शत्रु की बुद्धि, वाणी और क्रियाशक्ति को रोक देती हैं। मध्यप्रदेश के नलखेड़ा (जिला: आगर मालवा) में स्थित माँ बगलामुखी का शक्तिपीठ तंत्र साधकों और भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।
धार्मिक अनुष्ठान हमारे जीवन में आध्यात्मिक संतुलन, मानसिक शांति और कर्मों के शुद्धिकरण के लिए किए जाते हैं। लेकिन यह जानना बेहद आवश्यक है कि हर व्यक्ति के लिए हर उपाय या पूजा सही नहीं होती। यदि आप बिना उचित ज्योतिषीय मार्गदर्शन के जप, हवन या अनुष्ठान करते हैं, तो कई बार उसका उल्टा प्रभाव भी देखने को मिल सकता है।