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अंगारेश्वर महादेव मंदिर, उज्जैन, मंगलभात पूजन का इतिहास, प्रक्रिया और महत्व

🕉️ परिचय

उज्जैन नगरी स्वयं शिव की नगरी है और यहाँ के 84 महादेवों में से एक अत्यंत प्राचीन एवं जाग्रत स्थल है — अंगारेश्वर महादेव मंदिर, जो विशेष रूप से मंगल दोष, कुंडली में पित्र दोष, कर्ज एवं वैवाहिक अड़चनों को दूर करने के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पर विशेष रूप से मंगलभात पूजन किया जाता है, जो भारतवर्ष में एकमात्र ऐसी विशेष पूजन परंपरा मानी जाती है।

📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अंगारेश्वर मंदिर का नाम "अंगारक" ग्रह से जुड़ा हुआ है, जो मंगल ग्रह का ही अन्य नाम है। ऐसी मान्यता है कि स्वयं मंगल देव ने यहाँ घोर तप किया था और भगवान शिव ने उन्हें वरदान स्वरूप इसी स्थान पर अंगारेश्वर रूप में विराजमान होने की अनुमति दी।

- यह मंदिर महाकालेश्वर मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है।

- यह स्थानप्राचीन काल से मंगल दोष शमन हेतु प्रसिद्ध रहा है।

- यहीं से "मंगल भात" पूजन की परंपरा प्रारंभ हुई थी।

🔱 अंगारेश्वर महादेव की विशेषता

- यहाँ शिवलिंग के दर्शन मात्र से मंगल दोष, भूमि विवाद, विवाह में देरी, और कर्ज की बाधा समाप्त होती है।

- अंगारेश्वर शिवलिंग में अग्नि तत्व की विशेष ऊर्जा है, जो नकारात्मक ग्रहों की स्थिति को शांत करती है।

- यहाँ विशेष रूप से मंगलवार को भक्तों की भारी भीड़ होती है।

🍚 मंगलभात पूजन: एक दिव्य विधान

🔺 पूजन किनके लिए आवश्यक है?

- जिनकी कुंडली में मंगल दोष है (मांगलिक व्यक्ति)।

- विवाह में विलंब, वैवाहिक जीवन में कलह, संतान बाधा, भूमि विवाद।

- जिन्हें बार-बार ऋण, दुर्घटना या शारीरिक कष्ट हो।

- कुंडली में अंगारक योग या चंद्र-मंगल योग हो।

🙏 पूजन की प्रक्रिया

- पूर्व या दक्षिणाभिमुख होकर पूजन करना होता है।

- पूजन में विशेष सामग्री होती है – पीले वस्त्र, लाल फूल, केसर, गुलाल, सिंदूर, पंचामृत, भात (चावल), मूंग, तांबे का कलश।

- विशेष मंगलभात मंत्र जप किया जाता है: "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।"

- पूजा के अंत में "भात" (चावल व मूंग का पकवान) को प्रसाद रूप में चढ़ाया जाता है।

- पूजन के बाद गरीबों में भात प्रसाद का वितरण किया जाता है।

🌟 मान्यता है कि इस पूजन से 7 से 90 दिनों में प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है – जैसे विवाह के प्रस्ताव आना, जमीन विवाद सुलझना, कोर्ट केस में राहत आदि।

🌞 मंगल दोष से जुड़ी आध्यात्मिक मान्यताएँ

- मंगल ग्रह क्रूर ग्रह माने जाते हैं, परंतु उनकी ऊर्जा सही दिशा में प्रयोग की जाए तो यह पराक्रम, भूमि प्राप्ति, संतान सुख और साहस प्रदान करते हैं।

- अंगारेश्वर मंदिर में पूजन से यह ऊर्जा संतुलित होती है।

🚩 अंगारेश्वर मंदिर की यात्रा

- मंदिर उज्जैन रेलवे स्टेशन से लगभग 2 किमी की दूरी पर स्थित है।

- मंदिर परिसर शांत, दिव्य और ध्यान व तंत्र-साधना के लिए आदर्श माना जाता है।

- हर मंगलवार और मंगल त्रयोदशी पर यहाँ विशेष पूजन और हवन होता है।

📿 निष्कर्ष

अंगारेश्वर महादेव मंदिर और मंगलभात पूजन उज्जैन का एक ऐसा आध्यात्मिक रहस्य है, जिसे अनुभव करना ही इसका प्रमाण है। अगर जीवन में बार-बार संघर्ष, देरी या ग्रहबाधा से परेशान हैं, तो यह पूजन एक चमत्कारी समाधान हो सकता है। गुरु निर्देश और विधिवत पूजन से न केवल ग्रह शांत होते हैं, बल्कि जीवन में शुभ अवसरों का आगमन होता है।


✍️ लेखक: आचार्य सुनील जी

(तांत्रिक साधना, भैरव अनुष्ठान व गुप्त पूजा विशेषज्ञ)